Monday, January 26, 2026

प्रिये ! मैं गाता रहूँगा

 प्रिये ! मैं गाता रहूँगा
यदि इशारे हों तुम्हारे, प्रिये ! मैं गाता रहूँगा।

प्रेम-पथ का पथिक हूँ मैं,
प्रेम हो साकार तुम,
मुझ अकिंचन को हमेशा,
बाँटती हो प्यार तुम,
पात्र लेकर रिक्त, द्वारे नित्य ही आता रहूँगा।

सरस है जीवन तुम्हीं से,
हर दिवस मधुमास है,
रात का हर पल, तुम्हारे-
प्रेम का ही रास है,
वेणु का हर सुर मधुरतम तुम्हीं से पाता रहूँगा।

खिलेंगे जब, तक तुम्हारे-
युगल नयनों में कमल,
तभी तक सुखमय रहेंगे,
जिन्दगी के चार पल,
मैं मधुप हर पंखुडी पर बैठ मुस्काता रहूँगा।

प्रेम से जीवन मेरा
तुमने संवारा जिस तरह,
मैं तुम्हें प्रतिदान इसका
दे सकूँगा किस तरह
नित्य बलिहारी तुम्हारे प्रेम पर जाता रहूँगा।
...

-त्रिलोक सिंह ठकुरेला

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